Shayari

एहसान रहा इल्ज़ाम लगाने वालों

किसी ने हमसे कहा, इश्क़ धीमा ज़हर है,
हमने मुस्कुराके कहा, हमें जल्दी पीना है।

“मैं कौन हूँ यह पता चल जाये तो मुझे
भी बता देना…
—” काफी दिनों से तलाश है मुझे मेरी “—”

जितना प्यार तुम्हें अब तक ख़्वाबों में किया है,

उससे कहीं ज़्यादा हक़ीक़त में करने का अरमान है…!!

देख लो आवाज़ दे कर, पास अपने पाओगे आओगे तनहा मगर, तनहा नहीं तुम जाओगे❤

दूर रहकर भी तुम ही पर रहती है अपनी नज़र बाहों में हम थाम लेंगे, जब भी ठोकर खाओगे❤

ले ना बदले में तुम्हारे, गर खुदाई भी मिले छोड़ देंगे दो जहां को, जब भी तुम फरमाओगे❤

बेवफ़ाई भी करो तो, माफ़ कर देंगे तुम्हे हम ना वादों से फिरेंगे, तुम अगर फिर जाओगे❤

*देखकर पलकें मेरी …..कहने लगा कोई फक़ीर…..*इन पे बरख़ुरदार …..सपनो का वज़न कुछ कम करो…..*

: गजब है उनका हंस कर
नज़रेँ झुका लेना..!!पु

छो तो कहते हैँ कुछ नहीँ बस युँ ही..!!❤

*बैठे थे अपनी मस्ती में कि अचानक तड़प उठे…..*
*आ कर तुम्हारी याद ने अच्छा नहीं किया !!*

: कभी तुम पूछ लेना, …
कभी हम भी ज़िक्र कर लेगें
छुपाकर दिल के दर्द को,
एक दूसरे की फ़िक्र कर लेंगे
💗💗💗
*तुम बिन चलते तो है,*
पर पहुँचते कहीं नही।*

वो कर दिया तूने जो ना कर पाए हकीम भी।

के तेरे छूने से अब मीठा हो गया है नीम भी।

आज कल सब कहते है मैं बुझा बुझा सा रहता हूँ..

.अगर जलता रहता तो खाक नहीं हो जाता !!!

काश़ कोई ऐसी लापरवाही हो जाए मुझसे…

कि अपने ग़म की गठरी कहीं भूल आऊँ मैं…।।

कोई हमारा भी था…!!
खुदा जाने कब की बात थी…!!

*उसे ये शिकवा के मैं उसे समझ न सका..*

*और मुझे ये नाज़ के मैं जानता बस उसको था..!!*

राहों मे ठहराव नही रखते..मुसाफिरों से लगाव नही रखते..
बनाते है खुद नए कदमों के निशान.. पुराने निशानों पर हम पांव नही
रखते..

*कहती हैं मुझे ज़िन्दगी*
*कि मैं आदतें बदल लूँ,*

*बहुत चला मैं लोगों के पीछे,*
*अब थोड़ा खुद के साथ चल लूँ*

*मुमकिन नही….*
*हर ‘वक्त’ मेहरबां रहे जिंदगी ….*

*कुछ ‘लम्हे’….*
*जीने का तजुर्बा भी सिखाते है….*

ज़माना ज़हर देता है उसे,*
*जो रिवाज़ से हटकर बोलता है।।*
*तुझे अच्छा कहेगा कोई कैसे,,*
*तू सच को खुलकर बोलता है।।*

एहसान रहा इल्ज़ाम लगाने वालों का मुझ पर।।*
*उठती उंगलियों ने मुझे मशहूर कर दिया।।*

“जो लम्हा साथ हैं . . .उसे जी भर के जी लेना.*

*” कम्बख्त” ये “जिंदगी”. . .”भरोसे” के काबिल नहीं है.!!*🌹

कितना अच्छा होता जो “राहें” बोला करतीं
ग़लत राह” चलने पर हमें टोक दिया करतीं

: चख के तो देखो मुझे ज़हर समझने वालो
हो भी सकता है कि मैं शहद से मीठा निकलूं

हमारे जीने का तरीका थोड़ा अलग है
हम उमीद पर नहीं अपनी जिद पर जीते है

परख से परे है शख्सियत मेरी,
मैं उनके लिए हूँ जो मुझ पे यकीं रखते हैं

झूठी बात पर जो वाह करेंगे।।*
*वही तो कल तुम्हें तबाह करेंगे।।*

‬: मुहब्बत नहीं है नाम सिर्फ पा लेने का…. बिछड़ के भी अक्सर दिल धड़कते हैं साथ-साथ….!!

*सिर्फ़ दो ही गवाह थे मेरी वफ़ा के,*
*एक वक्त, और एक वो,*
एक गुज़र गया और एक मुकर गया !!*

मेरे ख़्वाबों को तुम कभी टूटने ना देना,
खुद को कभी मुझसे रूठने ना देना !!
🌹

कुछ और चुनिदा शायरियों के लिए नीचे लिखे links पर क्लिक कीजिए। 

हम तो मोहब्बत बेहिसाब ही करेंगे ..

एक आखिरी ख़त लिखने की ख्वाईश थी।

हथेली पर रखकर नसीब …..