Shayari

एक आखिरी ख़त लिखने की ख्वाईश थी।

प्रस्तुत शेर मेरे दोस्तों ने मुझे भेजे है जो मुझे काफी पसंद आये । मुझे यकीन है आपको भी ये सभी पसंद आएंगे। 

 

दुनिया फरेब करके हुनरमंद हो गयी..~~*

*हम ऐतबार करके गुनाहगार हो गये..~~*

 

मिजाज* *हमारा भी है*
*कुछ – कुछ*
*समन्दर* *के* *पानी जैसा..!*

*खारे हैं*….. *मगर* *खरे हैं..!!*

एक आख़री ख़त..
लिखने कि ख़्वाहिश थी मेरी…

पर सुना है पता बदल गया है उनका

💖तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो,,

शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो….

*मुझको छाँव में रख दिया और खुद जलते रहे धूप में….!!*
मैंने देखा है एक ऐसा फरिश्ता अपने वालिद के रूप में…*

*मेरी जिंदगी की पहलीm,  किताब हो तुम..*
*जो बिना रटे मुझे अब तक याद हो तुम..।

मैं थक गया हूं परवाह करते करते…
जब से लापरवाह हुआ बड़ा आराम सा है…🌹

बिना __मिले _ही _तेरा _यूं*
मोहब्बत _करना _मुझसे…
बस _तेरी _यही _चाहत*
*_तो _मुझे _पसन्द है..!

बहुत सरल है, किसी को पसंद आना ..!!*
कठिन तो है.. हमेंशा पसंद बने रहना..!!

*सुना है मोहब्बत लाजवाब करते हो तुम*

लो हमने दे दिया दिल अब देखते है इसका क्या हाल करते हो तुम*

किसे बयान करूं दिल कि बेक़रारी को
वो जिसको आना था अब तक नज़र नहीं आया

प्यार पाओगे प्यार देकर ही
प्यार बिकता नहीं दुकानों में

अक्सर वो फैसले , मेरे हक़ में गलत हुए…

जिन फैसलो के नीचे , तेरे दस्तखत हुए…!!

ये बुजदिलों की तरह आधा अधूरा इश्क़ हमसे नहीं होता,
हम जब भी करेंगे मोहब्बत बेइन्तहां ही होगी….

सोचकर बाजार गई थी कुछ अश्क बेंचने,,💧
हर खरीददार ने यही कहा,

*तोहफे बिका नहीं करते….!!*

💖☝🏻🍁
*चाँद*
*मेरे लिये*
*निकलता है…**देख सब लेते हैं………!*🌹

 

👈लौट आयी है देखो बारिशें भी यहाँ…!!!*

*एक तुमको ही लौट आने की फुरसत नहीं…!!

 

वो तैरते तैरते डूब गये, जिन्हे खुद पर गुमान था।।*

और वो डूबते डूबते भी तर गये.. जिन पर तू मेहरबान था।।*

 

*खींच कर उतार देते हैं,उम्र की चादर*

*ये कम्बख्त दोस्त,कभी बूढ़ा नहीं होने देत

 

अब हम और …..

सीख नहीं पा रहा ..

तस्वीर बनाओ तो ….

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