Shayari

हथेली पर रखकर नसीब …..

ये सभी शेर मेरे  मित्र रिंकू अजमानी जी   की संग्रह से लिए गए है /

उम्मीद है आपको पसंद आएंगे /  व्हाट्सएप से जुड़े इस संग्रह पर अक्सर उम्दा नज़्म लिखी जा रही है, मै बहुत ही एहसान मंद हु ग्रूप  अड्मिन विनय सर का जिन्होने मुझे इस ग्रूप से जोड़ा /

 

1 सुना है रेत पर चलकर अक्सर तुम मुस्कराती हो/

कहो तो अबकी बार मै ज़मीन की धूल बन जाऊँ //

 

2 नाराज़ न हो दरिया …. दो बूंद आब लेने से /

एक पौधा प्यासा था….. मुझसे देखा न गया//

3। शौक नहीं है मुझको जस्बातों को सारे आम लिखने का/

क्या करू जरिया ही यही है तुमसे बात करने का //

4। भूल जाने का मशवरा और ज़िंदगी बनाने की सलाह /

ये कुछ तोहफे मिले थे उस आखरी मुलाक़ात मे//

5 वक़्त ने तराशा बहुत मुझे हीरा बनाने को /

मै कोयला ही बना रहा बिक जाने के खौफ से …//

6 मै हँसता हूँ तो बस अपने ग़म छिपाने को /

और लोग कहते है काश हम भी इसके जैसे होते //

 

7। मुझे नज़र अंदाज़ करने की एक वजह तो बताओ /

फिर मैं तुम्हें चाहने की हज़ार वजहें बताता हूँ //

9 हमने रोती हुई आंखो को हँसाया है अक्सर /

इससे बेहतर इबादत अब हमसे न होगी//

10 खुद को मेरे दिल में ही छोड़ गए /

तुम्हें तो ठीक से बिछड़ना भी नहीं आता//

11 उम्र बड़ना तो दस्तूर ये जहां है /

मगर महसूस न करो तो उम्र बड़ती कहाँ है //

12 हर नज़र में मुमकिन नहीं है बेगुनाह रहना /

वादा ये करें की खुद की नज़र में बेदाग रहें //

 

13 हथेली पर रखकर नसीब तू क्यों अपना मुकद्दर ढूंद्ता है

सीख उस समंदर से जो टकराने के लिए पत्थर ढ्ंद्ता है //

 

कृपया इन्हें भी देखें 

जंगली जड़ी बूटी सा हूँ …

हम तो मोहब्बत बेहिसाब ही करेंगे ..

अब हम और …..

तस्वीर बनाओ तो ….

चलो कुछ पुराने दोस्तों के पास

किसी ने कहा है …