Shayari

जंगली जड़ी बूटी सा हूँ …

.1..कुछ लोगों की मोहब्बत सरकारी होती है ,

न फाइल आगे बड़ती है और न ही मामला बंद होता है /

 

2 जगली जड़ी बूटी सा हूँ , 

किसी को ज़हर तो किसी को दवा सा लगता हूँ//

3। रख लो आईने हज़ार तस्सली के लिए ,

पर सच के लिए तो आखे ही मिलानी पड़ेगी //

 

4। अजीब है दुनिया का दस्तूर , लोग इतनी जल्दी बात नहीं मानते 

जितनी जल्दी आप बुरा मान जाते हो//

 

5। न किस्सों मे,न किस्तों में 

ज़िंदगी की खूबसूरती है चंद सच्चे रिश्तों में//

 

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हम तो मोहब्बत बेहिसाब ही करेंगे ..   

अब हम और …..

सीख नहीं पा रहा ..

ठिकाना कब्र है …

तस्वीर बनाओ तो ….

जमाना बड़े शौक से …

चलो कुछ पुराने दोस्तों के पास

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