Shayari

अब हम और …..

fine dotes
Upendra Singh

1। धडकनों को कैसे संभालू मै, ये मेरी सुनती ही नहीं

जब भी  उसका नाम ज़हन में आता है, ये रुकती ही नहीं /


2 पगली बहुत प्यार से मनाऊँगा तुझे,

 एक बार मेरी होकर रूठो तो सही


3 उसके लिए तो मैंने यहाँ तक दुआएं की है,

कोई उसे चाहे भी तो बस मेरी तरहा चाहे //


4। मधुशाला मे गिरता तो खुद ही उठ जाता साहब

मोहब्बत मेँ गिरा हूँ, अब तो खुदा ही उठाएगा //


5 बेतहाशा इश्क करने लगे है….. वजह तुम हो

बिखरे-बिखरे से अब सवारने लगे है ,-…. वजह तुम हो


6 अपने ख्वाबों मे मुझे जिसने भी देखा होगा ……

……आँख खुलते ही दुंढ्ने निकला होगा


7। अब हम और सुधार नहीं सकते

बादल लीजिये या बर्दाश्त कीजिये //


8। नाम तो कांटो का ही लगेगा, ये सोचकर—

कई बार फूल भी चुपचाप जख्म दे जाते है //

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