Shayari

सीख नहीं पा रहा ..

ख्वाइशों का कैदी हु मैं , मुझे हक़ीक़तें सज़ा देती है //

1 सीख नहीं पा रहा मीठे झूठ बोलने का हुनर /

कडवे सच ने हुमसे न जाने कितने लोग छीन लिए //

2। खुशमिजाजी मशहूर है हमारी ..सादगी भी कमाल है /

हम शरारती भी इम्तेहा के हैं ,और तन्हा भी बेमिसाल है /

3। जमी पर रह कर आसमां को छूने की फितरत है मेरी ,

पर गिरा कर किसिस को ऊपर उठाने का शौक नहीं मुझे //

4। मेरी खामोशियों का राज़ मुझे खुद नहीं मालूम …

जाने क्यों लोग मुझे मगरूर समझते हैं //

5। देखी जो नब्ज़ मेरी , हँस कर बोला वो हाकिम ,

जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ  … तेरे मर्ज की दवा वही हैं //

6। सब बदल गए आहिस्ता आहिस्ता ….साहब !

अब तो हमारा भी हक़ बनता है //

7। रिश्तो की दलदल से कैसे निकलेंगे ?

जब हर साजिश के पीछे अपने निकलेंगे //

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हम तो मोहब्बत बेहिसाब ही करेंगे ..

हथेली पर रखकर नसीब …..

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